मेरी ज़मीं ..
Thursday, March 10, 2016
दर्द में बने रिश्ते लम्बे ठहरतें हैं
हाथों को मुस्कुराते हुए
सपने में ही देखा था उसने
छोटे छोटे हाथ
गला नहीं दबा सकते थे
एक काले दिन में कभी
एक फैंसला जो किया था
वो बीता ही नहीं कभी
बार बार आया वो दिन फिर
और दबाया गला
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Monday, December 21, 2015
साथी..
उड़ते वक़्त बस आसमान दिखता था उसे
नीला, सफ़ेद, खूबसूरत हवा आँखों में जाती तो जैसे दुनिया जीत रहा हो होंठों पर एक सूखापन लुभाता खूब
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Thursday, August 13, 2015
जीवन, शायद
नन्हे नन्हे दो हाथ निकलते हैं मिटटी से
कब्र है शायद वहां
आप सोचते हैं एक पल और बढ़ते हैं आगे
गहरी खाई हरे रंग की
उससे बहता है एक सपना
जन्मो से बहने वाला ये सपना
टूटता है बीच में
और देता है जन्म
एक बच्ची को
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Thursday, August 6, 2015
लौटना
घाव में नमक डालते हुए
हम आज़ाद होने की उम्मीद में
अपने बच्चों को दे रहे थे कुछ सुख
चुन रहे थे एक वक़्त उनके लिए
जिसकी डालियों पर कांटें थे मगर
खूशबू आती थी जड़ों से
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Friday, July 24, 2015
बिंदु में
सपने में गुड़िया
हवा पानी आग
हर रंग हर चिराग
डूबे जो एक बार
तिनका मिले न मिले
,
ठण्ड मिलेगी
बर्फ बनकर पिघल रहे हैं हम
कागज़ के सफ़ेद पन्नो पर
लाल स्याही से लिखा जा रहा है
पुराना सा कोई किस्सा
नए किरदार धोखे में हैं
ख़ुशी बड़ी चीज़ है
संगीत खूबसूरत हमेशा के जैसे
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Thursday, July 23, 2015
कोलाहल
दबते दबते धीमा हुआ और फिर निकल गया वो
दुबकते दुबकते जैसे घर से भाग जाया करते थे आप दोपहरों में
दरवाज़े खटखटाने से आवाज़ आती है
दिल धड़कने से सन्नाटा जन्म लेता है
दालों को मिलाने से नया स्वाद पता चलता है
और रंगों को मिलाने से अंधेरा हो जाता है
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Wednesday, May 20, 2015
दूर की रोशनियाँ ..
पडोसी थोड़ा ज़्यादा सच्चा रहा हमेशा
दूर की रौशनी ज़्यादा खूबसूरत
हम पिघल रहें हैं ज़रा ज़रा
या जम रहें हैं अंदर
ठंडक हो या गर्मी
पानी की ज़रूरत रहेगी हमेशा
वो जो खुद को जुदा मानता है
नहीं जानता मतलब दूरियों का
वो जो बहता है नसों में
पहाड़ों पर ढूंढता है अपनी जगह
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