Wednesday, April 13, 2016

सफ़ेद गुलाबी

टेढ़ी मेढ़ी गलियां हैं। गलियां नहीं रास्ते। टेढ़े मेढ़े नहीं, ऊपर नीचे ! सांप की तरह फैले हुए, एक लम्बा सांप। अनन्त। एक लड़की है, छोटी लड़की, हवा के जैसी । छोटी लड़की ऊपर चढ़ती है। कोई दस कदम, और देखती है मुड़कर नीचे की ओर, हर दस कदम पर। घर छोटा, फिर थोड़ा ओर छोटा फिर थोड़ा ओर ऊपर से ओर  भी छोटा नज़र आता है। जैसे खेल हो गया है एक, हर दस कदम, और घर ओर छोटा। अब जब वो पहुँचने वाली है सबसे ऊपर की चोटी पर, तो नहीं कर पा रही है फैसला की जाए तो कहाँ जाए इसके बाद?



अनगिनत

सभांलकर रखने का मन नहीं होता कुछ
बस बिखर जाए सब
और हो जाए लापता
एक दिन आये लौटकर 
और धीरे से हाथ रखकर कांधे पर पूछे, 
क्या हाल?, सब अच्छा ?



Monday, April 4, 2016

बहाव

एक वक़्त है
जो जम गया है
जिसे ठहरना है वहीँ
न खुशबू है उसकी
न मौजूदगी
एक ठंडक है मुझमें
तुम्हे भाइ नहीं कभी जो
मुझे बचाती रही सदा



राह

राह में मुडोंगे कई बार
देखोगे एक ही राह, बार बार
ढूंढोगे एक चेहरा
मगर जो दिल दुखा है 
वो चेहरे ना आया करते हैं नज़र यूँ