Saturday, February 16, 2019

कैसे

बक्श दो माफ् कर दो मुझे
मैंने पाप किएँ हों जो भी
मैं मान लेती हूँ और भाग जाती हूँ

मेरे सच पर इतनी परतें चढ़ चुकी थी
की अब मैं खुद भी भूल चुकी थी हक़ीक़त उसकी
मैंने चाहा था मरना
लेकिन मुझे याद आई पापा की दवाई
मैंने चाहा था कि मैं उसको समझा पाती
लेकिन मुझे बस धुंध याद आयी

मैं कैसे बताऊं आपको
कैसे करूँ मैं हिसाब
और कैसे करूँ अपनी सच्चाई साबित
मैंने नही मारा था उसे,
उसने बहुत पहले ही गला नोंच डाला था मेरा।

मगर सब बेकार था
सब बेमतलब अब। 



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